समाजशास्त्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञान
(Sociology and other social science)

समाजशास्त्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञान में संबंध एवं भिन्नता से यह स्पष्ट हो जाता है कि समाजशास्त्रीय अध्ययन का केंद्र बिंदु क्या है ? समाजशास्त्रीय ज्ञान अन्य सामाजिक विज्ञान से किस तरह बौद्धिक विषय के रूप में विशिष्ट एवं अलग है | समाजशास्त्र अन्य सामाजिक विज्ञानों को समीप लाने का कार्य भी करता है | इसलिए बार्न्स एवं बेकर ने कहा है कि “समाजशास्त्र अन्य सामाजिक विज्ञानों की न तो गृहस्वामिनी है और न ही दासी बल्कि उसकी बहन है” |

समाजशास्त्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञान

समाजशास्त्र एवम् मानवशास्त्र (Sociology and Anthropology)

समाजशास्त्र एवं मानवशास्त्र दोनों एक दूसरे से इतने घनिष्ठ रुप से संबद्ध है कि क्रोवर ने इन्हें जुड़वा बहने (Twin Sisters) कहा है | समाजशास्त्र एवं मानवशास्त्र में घनिष्ठता के बावजूद भिन्नता भी है जिसे निम्न बिंदुओं में देखा जा सकता है –
(1) समाजशास्र मुख्यतः आधुनिक या विकसित समाज का अध्ययन करता है ,जबकि मानवशास्त्र सरल समाज ( जनजातीय एवं कृषक) का |

(2) समाजशास्त्री अपने शोध पद्धति में प्रश्नावली (Questionnaire) एवं साक्षात्कार (Interview) को अपनाते हैं ,जबकि मानवशास्त्री सहभागी अवलोकन (Participant Observation) को |

(3) समाज शास्त्री सामाजिक घटनाओं का अध्ययन सामाजिक दृष्टिकोण से करता है
,जबकि मानवशास्त्री सांस्कृतिक दृष्टिकोण से |

समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र (Sociology and Economics)

अर्थशास्त्र मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन करता है | इस रूप में अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र में संबंध होना स्वाभाविक है क्योंकि कोई भी आर्थिक संबंध सामाजिक संबंधों का ही विशिष्ट स्वरुप होता है | समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र में संबंध होने के बावजूद निम्न अंतर भी है –

(1) समाजशास्त्र मनुष्य के संपूर्ण सामाजिक जीवन का अध्ययन करता है, जबकि अर्थशास्त्र मनुष्य के जीवन विशिष्ट पक्ष अर्थात आर्थिक पहलू का अध्ययन करता है |

(2) समाजशास्त्र शोध में निरीक्षण पद्धति ,सामाजिक सर्वेक्षण विधि आदि पद्धतियों का प्रयोग करता है, जबकि अर्थशास्त्र आगमन एवं निगमन पद्धति का प्रयोग करता है |

समाजशास्त्र एवं मनोविज्ञान (Sociology and Psychology)

समाजशास्त्र एवं मनोविज्ञान दोनों ही व्यवहारवादी विज्ञान के रूप में जाने जाते हैं | मानसिक प्रक्रिया भी इस अर्थ में सामाजिक है कि यह प्रत्येक क्षण व्यक्तियों की अन्तःक्रियाओं और सामाजिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित एवं निश्चित होता है | दूसरी अोर सामाजिक शक्तियाँ एवं अन्तःक्रियाएं व्यक्तियों की मानसिक प्रक्रियाओं की ही उपज है |

उपयुक्त समानता के बावजूद समाजशास्त्र मनोविज्ञान में अंतर भी है भी है –

(1) समाजशास्त्र का मौलिक संबंध समाज और सामाजिक प्रक्रियाओं से है ,जबकि मनोविज्ञान का संबंध व्यक्ति और उसकी मानसिक प्रक्रियाओं से है |

(2) समाजशास्त्र व्यक्तियों के बीच के साझे विशेषताओं का अध्ययन करता है ,जबकि मनोविज्ञान व्यक्तियों के बीच के भिन्न एवं अनोखे विशेषताओं का अध्ययन करता है |

(3) समाजशास्त्र के अनुसार सामाजिक व्यवहारों का आधार सामाजिक संबंध एवं अंतःक्रियाएं हैं ,जबकि मनोविज्ञान के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक व्यवहार का आधार स्वयं मनुष्य की ही मानसिक विशेषताएं हैं |

समाजशास्त्र एवं राजनीतिक विज्ञान (Sociology and Political Science)

राजनीतिशास्त्र मनुष्य को सामाजिक प्राणी मानकर अध्ययन करता है ,जबकि समाजशास्त्र यह बताता है कि मनुष्य क्यों और कैसे राजनीतिक प्राणी बना | समाजशास्त्र के अंतर्गत राजनीतिक समाजशास्त्र की एक शाखा का विकास दोनों के घनिष्ठ संबंध को दर्शाता है |दोनों शास्त्रों में घनिष्ठ संबंध होते हुए भी कुछ मौलिक अंतर हैं –

(1) राजनीतिशास्त्र का दृष्टिकोण एक पक्षीय एवं विशिष्ट है,जबकि समाजशास्त्र का दृष्टिकोण समग्र है |

(2) व्यवहारिकता की दृष्टि से राजनीतिशास्त्र का ज्ञान केवल राजनीतिशास्त्र के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है, जबकि समाजशास्त्र का ज्ञान जीवन के सभी क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकता है |

(3) समाजशास्त्र सामाजिक नियंत्रण के समस्त साधनों का अध्ययन करता है – जैसे प्रथा ,रूढ़ियाँ, विधान, संस्थाएं आदि ,जबकि राजनीतिशास्त्र केवल उन्हीं नियंत्रण का अध्ययन करता है ,जिन्हें राज्य द्वारा मान्यता मिली हो |

समाजशास्त्र एवं इतिहास (Sociology and History)

मानव के अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध अध्ययन ही इतिहास है ,जबकि समाजशास्त्र अतीत की घटनाओं के आधार पर वर्तमान घटनाओं का क्रमबद्ध अध्ययन करता है | दोनों के संबंधों पर जी. ई. हावर्ड (G. E. Horward) का कथन है कि इतिहास अतीत का समाजशास्त्र है जबकि समाजशास्त्र वर्तमान समाज का इतिहास है | समाजशास्त्र एवं इतिहास के अंतर को निम्न बिंदुओं में देखा जा सकता है –

(1) समाजशास्त्र के लिए अतीत का महत्त्व साधन के स्तर पर ही होता है ,वर्तमान समाजशास्त्र का साध्य होता है, जबकि इतिहास के लिए अतीत साधन एवं साध्य दोनों होता है |

(2) समाजशास्त्र भविष्य की ओर संकेत करनी की क्षमता रखता है ,जबकि इतिहास केवल इतिहास का निरूपण करता है |

(3) समाजशास्त्र आँकड़े संग्रह करने में अन्य सामाजिक पद्धतियों के साथ ऐतिहासिक पद्धति को एक पद्धति के रूप में अपनाता है ,जबकि इतिहास में अन्य पद्धतियों के उपयोग की संभावना नहीं है |

समाजशास्त्र एवं दर्शनशास्त्र (Sociology and Philosophy)

समाजशास्त्र बहुत हद तक एक दर्शनशास्त्रीय महत्वाकांक्षा के साथ पैदा हुआ था ,इसका उद्देश्य उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोपीय सामाजिक संकट की व्याख्या करना और सिद्धांत प्रस्तुत करना था |समाजशास्त्र का संबंध समाज में मनुष्यों के व्यवहार से है ,क्योंकि यह व्यवहार अन्य लोगों में भी विद्यमान होते एवं उन्हें प्रभावित करते हैं | इस तरह यह व्यवहार मूल्यों (सामाजिक दर्शन) या आदर्शों के रुप में स्थापित हो जाता है |

अतः समाजशास्त्री सामाजिक व्यवहार का विश्लेषण दार्शनिक तरीके से नहीं करता ,बल्कि वह मूल्यों का अध्ययन सामाजिक तथ्य के रूप में करता है ,एवं इसका सामाजिक व्यवहार पर जो प्रभाव पड़ता है, उसका विश्लेषण करता है , उदाहरण के लिए यदि समाजशास्त्री भारतीय संस्कृति के दार्शनिक आधार से परिचित नहीं है तो वह भारतीय समाज का विश्लेषण एवं व्याख्या करने में सफल नहीं होगा लेकिन थोड़ी बहुत सामाजिक दर्शन की ट्रेनिंग के बाद समाज शास्त्री लोगों के कार्य करने के तरीके एवं स्वभाव, जो परंपराओं में निहित है ,को जान जाता है तब उसका अध्ययन एवं विश्लेषण वास्तविक हो जाता है |

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि एक दार्शनिक जो सामाजिक विज्ञान से परिचित है ,एवं एक समाजशास्त्री जो दार्शनिक पक्ष को अध्ययन में सम्मिलित करता है ,अपने क्षेत्र में अधिक प्रभावपूर्ण तरीके से निष्कर्ष तक पहुंच सकता है | जैसा कि वीरकांत ने भी कहा है कि समाजशास्त्र की उपयोगिता तभी संभव है ,जब वह दार्शनिक आधार को अपनाता है |

FAQ: समाजशास्त्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञान

किसने कहा है कि समाजशास्त्र सामाजिक संबंधों के विषय में है ?

मैकाइवर एवं पेज

समाजशास्त्र को सामाजिक सम्बन्धों का वैज्ञानिक अध्ययन क्यों कहा जाता है ?

विज्ञान का सामान्य अर्थ है यथार्थ | उदाहरण के लिए यदि एक घर में बटन दबाने पर लाइट जल जाती है , अगर कोई दूसरा व्यक्ति बटन दबाता है और लाइट जल जाती है; तो इसका तात्पर्य है कि यह विज्ञान है | क्योंकि विज्ञान व्यक्ति पर निर्भर न होकर प्रक्रिया पर निर्भर करता है |
इसी तरह समाजशास्त्र भी सामाजिक सम्बन्धों का यथार्थ अध्ययन करता है | अध्ययन द्वारा जो भी निष्कर्ष निकालता, यदि कोई अन्य व्यक्ति भी उसी परिस्थिति में अध्ययन करता है तो उसे वही निष्कर्ष मिलेगा | इसीलिए समाजशास्त्र को सामाजिक सम्बन्धों का वैज्ञानिक अध्ययन कहा जाता है |

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