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समाजशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ 1838/samajshastra ka kya arth hai ( Meaning and Definition of Sociology in Hindi)

समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा

समाजशास्त्र अर्थ web story

#समाजशास्त्र का अर्थ (Samajshastra ka kya arth hai) –

समाजशास्त्र अर्थ एवं परिभाषा; समाजशास्त्र दो शब्दों से मिलकर बना है | पहला लैटिन शब्द ‘Socius’ जिसका अर्थ है – समाज तथा दूसरा ग्रीक शब्द ‘Logos‘ जिसका अर्थ है – अध्ययन या विज्ञान | इस प्रकार समाजशास्त्र का शाब्दिक अर्थ समाज का विज्ञान है|

  • इस तरह हमने देखा कि समाजशास्त्र की उत्पत्ति दो भाषाओँ लैटिन एवं ग्रीक से हुई है |

 
  • चूँकि समाजशास्त्र दो भाषाओं लैटिन एवं ग्रीक से मिलकर बना है ,इसलिए जॉन स्टुअर्ट मिल (J.S.Mill) ने समाजशास्त्र को दो भाषाओं की अवैध संतान कहा एवं इसके स्थान पर इथोलॉजी (Ethology) शब्द के प्रयोग का सुझाव दिया |
 
  • अधिकांश विद्वानों ने इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया|
  • हरबर्ट स्पेंसर (Herbert Spencer) ने समाज का व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध अध्ययन किया; एवं अपनी किताब का नाम प्रिंसिपल ऑफ सोशियोलॉजी (Principles of Sociology) रखा| इसे समाजशास्त्र की प्रथम पाठ्य पुस्तक माना जाता है|
  • सन् 1838 में समाज का पूर्णता में अध्ययन करने के लिए काम्टे ने समाजशास्त्र शब्द का प्रयोग किया |
  • काम्टे ने सर्वप्रथम इस नये विषय का नाम सोशल फिजिक्स (Social Physics) रखा था |
  • बेल्जियम के वैज्ञानिक क्वेटलेट ने अपने एक लेख – ऐन एसे ऑन सोशल फिजिक्स (An essay on Social Physics) में सोशल फिजिक्स शब्द का प्रयोग किया, ,इससे क्षुब्ध होकर काम्टे ने विषय का नाम बदलकर सोशियोलॉजी (Sociology) रख दिया |
  • इस तरह हम देखते हैं कि समाजशास्त्र का जन्म से पूर्व नाम या यूँ कहें कि समाजशास्त्र का प्रथम नाम सोशल फिजिक्स था |

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#समाजशास्त्र की परिभाषा (Definition of Sociology in Hindi)

समाजशास्त्र की परिभाषा के द्वारा हम इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि समाजशास्त्र क्या है ,इसकी प्रकृति एवं विषय क्षेत्र क्या है, जिसका यह अध्ययन करता है |

  • समाजशास्त्र मुख्यतः अौद्योगिक समाज का अध्ययन करता है|
  • समाज के उन स्वरुपों का अध्ययन करता है; जो औद्योगिक क्रांति एवं फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम स्वरुप अस्तित्व में आया |
  • इस नए स्वरुप का संपूर्णता में अध्ययन करने की छमता उस समय के उपलब्ध विषयों में नहीं था |अतः इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए नए विषय के रूप में समाजशास्त्र अस्तित्व में आया|

एंथोनी गिडेंस (Anthony Giddens) लिखते हैं कि समाजशास्त्र आधुनिक समाज का विज्ञान है |समाजशास्त्र का मुख्य रुझान (concern) उन संस्थाओं का अध्ययन करना है जो पिछले दो शताब्दियों में हुए दो महान क्रांतियों के परिणाम स्वरुप अस्तित्व में आया |

 

फिर भी हम देखते हैं कि समाजशास्त्र अपने अध्ययन को आधुनिक समाज के अध्ययन तक सीमित नहीं रखता; क्योंकि जिस औद्योगिक समाज का यह अध्ययन करता है; उसका अतीत भी रहा है | इसलिए यह अपने अध्ययन में परंपरागत समाज(कृषक एवं जनजातीय) को भी सम्मिलित करता है |

परंपरागत समाज का अध्ययन आधुनिक समाज के अध्ययन को पूर्णता प्रदान करता है, साथ ही समाजशास्त्रीयों को सामाजिक परिवर्तन (Social Change) की दिशा एवं दशा को रेखांकित करने का आधार प्रदान करता है|

विद्वानों द्वारा दी गई समाजशास्त्र की परिभाषा को हम चार भागों में बांट सकते हैं |

(1) समाजशास्त्र समाज के अध्ययन के रूप में

  • लिस्टर एफ. वार्ड (Lester F. Ward) के अनुसार – “समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है“|
  • एफ. एच. गिडिंस (F. H. Giddings) के अनुसार – “समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है|
  • ओडम (Odum) के अनुसार “समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो समाज का अध्ययन करता है|

(2) समाजशास्त्र सामाजिक संबंधों के अध्ययन के रूप में

  • मैकाइवर एवं पेज (Maciver and Page) के अनुसार -“समाजशास्त्र सामाजिक संबंधों के विषय में है संबंधों के इसी जाल को हम समाज कहते हैं|
  • वॉन विज (Von Wiese) के अनुसार -“सामाजिक संबंध ही समाजशास्त्र की विषय वस्तु का एकमात्र वास्तविक आधार है|

(3) समाजशास्त्र समूहों के अध्ययन के रूप में

  • जॉनसन (Johnson) के अनुसार – “समाजशास्त्र सामाजिक समूहों का विज्ञान है|” (Sociology is the science that deals with social group.)

(4) समाजशास्त्र सामाजिक अंतःक्रिया के रूप में

  • मोरिस गिन्सवर्ग के अनुसार – “समाजशास्त्र मानवीय अंत:क्रियाओं और अंत:संबंधों, उनकी दशाओं और परिणामों का अध्ययन है |” अन्य विद्वानों द्वारा दी गई समाजशास्त्र की परिभाषा निम्न है –
  • हरबर्ट स्पेंसर के अनुसार – ” समाजशास्त्र सामाजिक प्रघटना (Social Phenomenon)का विज्ञान है |
  • दुर्खीम के अनुसार – “समाजशास्त्र सामूहिक प्रतिनिधानों (Collective Representation)का विज्ञान है|”
  • रॉबर्ट पार्क के अनुसार – “समाजशास्त्र सामूहिक व्यवहार(Collective Behaviour)का विज्ञान है|
  • फेयर चाइल्ड (Fair Child) के अनुसार —- “समाजशास्त्र मनुष्यों एवं उनके मानवीय पर्यावरण (Human Environment)के मध्य संबंधों का अध्ययन है|

समाजशास्त्र की अन्य परिभाषाएँ

  1. गिडिंग्स के अनुसार “समाजशास्त्र समग्र रूप में समाज का क्रमबद्ध अध्ययन तथा विवेचना है |
  2. जॉर्ज सिमेल के अनुसार “समाजशास्त्र मानवीय अन्तः संबंधों के स्वरूपों का विज्ञान है |
  3. गिलिन एवं गिलिन के अनुसार “व्यापक अर्थ में समाजशास्त्र व्यक्तियों के एक-दूसरे के संपर्क में आने के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली अन्तःक्रियाओं का अध्ययन कहा जा सकता है |”
  4. मैक्स वेबर के अनुसार “समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक क्रिया का विश्लेषणात्मक बोध (interpretative understanding) करने का प्रयत्न करता है |”
  5. पार्क एवं बर्गेस के अनुसार ” समाजशास्त्र सामूहिक व्यवहार का विज्ञान है |”
  6. किम्बाल यंग के अनुसार “समाजशास्त्र समूहों में मनुष्यों के व्यवहार का अध्ययन करता है |”
  7. क्यूबर के अनुसार “समाजशास्त्र मानवीय संबंधों के बारे में वैज्ञानिक ज्ञानपुंज हैं |”
  8. लुंडबर्ग के अनुसार “समाजशास्त्र वैज्ञानिक विधि द्वारा प्राप्त मानव के सामाजिक व्यवहारों से सम्बंधित सामान्यीकरण का अध्ययन है |”
  9. बोगार्डस के अनुसार “समाजशास्त्र उन विधियों का अध्ययन है, जिनमे सामाजिक अनुभव, अंतःवैज्ञनिक प्रेरणा द्वारा मनुष्यों को विकसित होने, प्रबुद्ध होने एवं दबाने में कार्य करते हैं |”
  10. ए. डब्लू. ग्रीन के अनुसार “समाजशास्त्र मनुष्य के सामाजिक संबंधों का समन्वयात्मक एवं सामान्यीकृत विज्ञान है |”
  11. डंकन मिचेल के अनुसार “समाजशास्त्र मानव-समाज के संरचनात्मक स्वरूपों से सम्बंधित वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक विज्ञान है |”

समाजशास्त्र की विशेषताएँ

  • समाजशास्त्र अपने अध्ययन में वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग करता है |
  • समाजशास्त्र क्या है, का वर्णन करता है |
  • समाजशास्त्र घटना का तटस्थ अवलोकन करता है |
  • समाजशास्त्र तथ्यों विश्लेषण एवं वर्गीकरण करता है |
  • समाजशास्त्र का अध्ययन कार्य-कारण संबंधों पर आधारित होता है |
  • समाजशास्त्र सिद्धांतों की परीक्षा एवं पुनर्परीक्षा करता है |
  • घटनाओं का यथार्थ अध्ययन कर; समाजशास्त्र में भविष्यवाणी करने की क्षमता भी होती है |

Google Questions-

समाजशास्त्र की सबसे अच्छी परिभाषा क्या है ?

समाजशास्त्र की सबसे अच्छी परिभाषा एन्थोनी गिडेंस की है | एन्थोनी गिडेंसके अनुसार एंथोनी गिडेंस समाजशास्त्र आधुनिक समाज का विज्ञान है |समाजशास्त्र का मुख्य रुझान (concern) उन संस्थाओं का अध्ययन करना है; जो पिछले दो शताब्दियों में हुए दो महान क्रांतियों के परिणाम स्वरुप अस्तित्व में आया |

समाजशास्त्र का क्या महत्त्व है ?

समाजशास्त्र की वैज्ञानिक अध्ययन पद्धति के द्वारा जब हम किसी सामाजिक समस्या का सटीक एवं यथार्थ अध्ययन कर लेते है; तब उस समस्या का समाधान आसान हो जाता है | जैसे – भारत में अथक प्रयास के बाद भी जब जन्म दर नियंत्रित नहीं हुआ; तब समाजशास्त्रियों ने अध्ययन में पाया कि यह एक सांस्कृतिक प्रक्रिया है; साथ ही जब तक बच्चों का मृत्यु दर नहीं नियंत्रित होता; जन्म दर को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है |

समाजशास्त्र का अध्ययन क्या है ?

समाजशास्त्र के अध्ययन के द्वारा एक व्यक्ति समाज से सम्बंधित अवधारणाओं, सिद्धांतों एवं पद्धतियों को समझकर समाज में प्रयोग करता है | समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलती है | समाजशास्त्र के अध्ययन से व्यक्ति एवं समाज के संबंधों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है |

समाजशास्त्र का उद्भव

समाजशास्त्र की विषयवस्तु

समाजशास्त्र का अन्य सामाजिक विज्ञानों से सम्बन्ध

व्यक्ति एवं समाज

मोटीवेशनल कोट्स हिन्दी में

5-मोटीवेशनल कोट्स हिन्दी मेंl

Objective Type QuestionsOne Liner Questions/Answers


57 thoughts on “समाजशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ 1838/samajshastra ka kya arth hai ( Meaning and Definition of Sociology in Hindi)”

  1. sir phle jo test ka system tha vo jya shi tha use ku hta diya gya sir maine apne sare dosto ko bhi ye app send kiya tha unki bhi yhi test vali problem hai

    1. धन्यवाद| कृपया कुछ दिनों में पुनः ब्लॉग पर आएं। हम सभी Topic के test डालने का प्रयास कर रहें हैं|

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