दहेज (Dowry)

दहेज प्रथा क्या है – दहेज को ऐतिहासिक रूप से देखें तो वैदिक काल में वैवाहिक मामलों में स्त्रियों के पुरुषों से अधिक अधिकार थे| स्त्रियों को जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता थी| जिसके लिए स्वयंबर का आयोजन होता था| लेकिन मनुस्मृति की रचना के बाद हिंदू विवाह से संबंधित नियम स्थापित हो गए, जिसमें आठ … Read more दहेज (Dowry)

भारत में क्षेत्रीय समस्याएँ (Regional problems in India)

भारत बहु-सांस्कृतिक देश होने के साथ भौगोलिक आधार पर भी एक दूसरे से भिन्न हैं| यहाँ उत्तर से दक्षिण एवं पूर्व से पश्चिम तक अनेक भिन्नता को देखा जा सकता है| भारत के क्षेत्रीय समस्याओं को निम्न विन्दुओं में देखा जा सकता है – (1) उत्तर पूर्वी राज्यों की समस्या (2) कश्मीर की समस्या (3) … Read more भारत में क्षेत्रीय समस्याएँ (Regional problems in India)

भारत में नृजातीय समस्याएँ (Ethnic Problems in India)

सामान्य अर्थों में धर्म या प्रजातीय भिन्नता को नृजातीयता (Ethnicity) समझ लिया जाता है| वास्तव में नृजातीयता एक भावना है| जब धर्म, भाषा, जाति, रंग, संस्कृति, क्षेत्र आदि के आधार पर कोई समूह एकजुट होकर अपनी भावना प्रदर्शित करे तो उसे नृजातियता कहते हैं| नृजातीय मनोवृत्ति, राष्ट्रीय मनोवृत्ति या हित से पृथक होती है| नृजातीयता … Read more भारत में नृजातीय समस्याएँ (Ethnic Problems in India)

भारत में धार्मिक समस्याएँ (Religious problems in India)

भारत एक बहुधर्मी देश है एवं अपनी विविधता में एकता जैसे उद्देश्य के लिए जाना जाता है| भारतीय संविधान में भी पंथनिरपेक्ष शब्द का उल्लेख है, जिसका तात्पर्य राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है साथ ही यह सभी धर्मों को समान महत्त्व देता है|लेकिन धार्मिक समस्याएँ तब उत्पन्न होती है जब कुछ लोग संगठित … Read more भारत में धार्मिक समस्याएँ (Religious problems in India)

लैंगिक असमानता या विषमता (Gender Inequality)

लैंगिक विषमता ( पढ़ें – असमानता या विषमता क्या है ) का तात्पर्य जैवकीय या शारीरिक भिन्नता से नहीं बल्कि स्त्री-पुरुष के सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्धों के स्तर पर स्त्रियों के साथ होने वाले भेदभाव से हैं| यह एक ऐसी समस्या है, जो मानवीय समाज के आरम्भिक काल से आज तक विद्यमान है| अधिकारों एवं सुविधाओं के … Read more लैंगिक असमानता या विषमता (Gender Inequality)

जाति असमानता या विषमता (Caste Inequality)

असमानता (Inequality) व्यक्ति जब अपने लाभ हानि के आधार पर समूहों का मूल्यांकन करता है तो वह स्वाभाविक रूप से उच्चता एवं निम्नता में बँट जाता है| इसी उच्चता एवं निम्नता को असमानता कहते हैं, उदाहरण के लिए – लैंगिक असमानता, भारत में जाति असमानता| असमानता प्राकृतिक अवधारणा न होकर एक सामाजिक अवधारणा है, जैसा … Read more जाति असमानता या विषमता (Caste Inequality)

निर्धनता (Poverty)

निर्धनता या गरीबी वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी तथा अपने पर आश्रित सदस्यों की आवश्यकता की पूर्ति धन के अभाव के कारण नहीं कर पाता है| जिसके कारण उसके परिवार को जीवन की न्यूनतम आवश्यकता जैसे रोटी, कपड़ा, मकान भी उपलब्ध नहीं हो पाता| दूसरे शब्दों में कहें तो समाज का वह व्यक्ति जो … Read more निर्धनता (Poverty)

ब्लूमर का प्रतीकात्मक अन्तःक्रियावाद
(Blumer’s Symbolic Interactionism)

हरबर्ट ब्लूमर, मीड के विचारों को आगे बढ़ाते हैं तथा अंतःक्रिया के व्यावहारिक स्वरूप की चर्चा करते हैं| ब्लूमर के अनुसार वस्तुओं एवं प्रतीकों में निहित अर्थ ही हमारी भूमिकाओं का निर्माण करते हैं| ब्लूमर का प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद तीन दृष्टिकोण (Perspective) पर आधारित है – (1) मनुष्य अर्थ के आधार पर वस्तुओं की ओर क्रिया … Read more ब्लूमर का प्रतीकात्मक अन्तःक्रियावाद
(Blumer’s Symbolic Interactionism)

प्रतीकात्मक अंत:क्रियावाद
(Symbolic Interactionism)

प्रतीकात्मक अंत:क्रियावाद समाज को स्थाई स्वरूप के रूप में देखने के प्रतिक्रिया स्वरूप अस्तित्व में आया| प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद के अनुसार समाज गतिशील है, समाज को निर्मित करने वाली सामाजिक क्रियाएं एवं भूमिकाएँ बदलती रहती है| इसलिए समाज का अध्ययन संरचनावादी दृष्टिकोण से न करके प्रक्रियावादी दृष्टिकोण से करना यथार्थ के ज्यादा नजदीक है| प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद … Read more प्रतीकात्मक अंत:क्रियावाद
(Symbolic Interactionism)

दुर्खीम का समाजीकरण का सिद्धांत
(Durkheim’s theory of Socialization)

दुर्खीम ने कभी प्रत्यक्ष रूप से स्वः के विकास के लिए समाजीकरण की चर्चा नहीं की लेकिन अपनी पुस्तक सोशियोलॉजी एंड फिलोसोफी (Sociology and Philosophy) में व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के लिए समाज की भूमिका को रेखांकित किया| मार्क्स की तरह दुर्खीम भी व्यक्ति को कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं मानते बल्कि समूह की सत्ता को … Read more दुर्खीम का समाजीकरण का सिद्धांत
(Durkheim’s theory of Socialization)

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