अपराध की अवधारणा एवं प्रकार (Concept and Types of Crime) –

अपराध किसे कहते है (apradh kise kahte hai)

वह कार्य जिससे किसी स्थान विशेष के कानून का उल्लंघन होता हो, उसे अपराध कहते हैं| समाजशास्त्र में अपराध का अध्ययन सामाजिक क्रिया के संदर्भ में किया जाता है| जिन सामाजिक क्रियाओं के लिए समाज नकारात्मक अनुशस्ति (दण्ड) की व्यवस्था करता है उसे अपराध कहते हैं| यह अपराध हत्या, डकैती, बलात्कार, चोट पहुँचाना, ट्रैफिक नियमों से विपरीत गाड़ी चलाना आदि हो सकता है|

अपराध की परिभाषा (apradh ki paribhasha)

सदरलैंड के अनुसार अपराध सामाजिक मूल्यों के लिए एक ऐसा घातक कार्य है जिसके लिए समाज दण्ड की व्यवस्था करता है|

मावरर के अनुसार अपराध सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन (Violation of social norms) है|

कानूनी दृष्टि से अपराध वह कार्य है जिसमें कानून का उल्लंघन अापराधिक नियत (Criminal intension) से किया जाय|

हाल्सबरी (Halsbury) के अनुसार अपराध एक गैर-कानूनी कार्य या त्रुटि है, जो जनता के विरुद्ध होता है और जिसके लिए अपराधी को कानून के अनुसार दण्ड दिया जाता है|

टैफ्ट (Taft) के अनुसार वैधानिक रूप से अपराध एक ऐसा कार्य है जो कानून के अनुसार दण्डनीय होता है|(Legally a crime is an act made punishable by law.)

जिरोम हाल (Jerome Hall) ने कानूनी दृष्टि से अपराध घोषित करने के लिए निम्न अनिवार्य मानदण्डों का उल्लेख किया है –

(1) कानून द्वारा वर्जित|

(2) इरादे से किया गया कार्य|

(3) समाज को होने वाली छति|

(4) अपराधी को होने वाला लाभ|

(5) निश्चित दण्ड का प्रावधान|

अपराध के प्रकार (Types of Crime) –

अमेरिकी समाजशास्त्री सदरलैण्ड (Sutherland) ने अपराध की गंभीरता के अनुसार अपराध को दो भागों में विभाजित किया

(1) साधारण अपराध – जैसे – चोरी, मारपीट, शराब पीना, आदि|

(2) गंभीर अपराध – जैसे – हत्या, बलात्कार, अपहरण, डकैती आदि|

बोंजर (Bonger) ने चार प्रकार के अपराध का उल्लेख किया है –

(1) आर्थिक अपराध (Economic Crime) –  जैसे – चोरी, डकैती, गबन, आदि|

(2) यौन संबंधी अपराध (Sexual Crime) – जैसे – बलात्कार, पर-स्त्री गमन आदि|

(3) राजनीतिक अपराध (Political Crime) – जैसे – राजद्रोह, रक्षा नियमों का उल्लंघन, राजनीतिक षड्यंत्र आदि|

(4) विविध अपराध (Miscellaneous) – इसके अंतर्गत प्रतिशोध की भावना से किए जाने वाले अपराध शामिल हैं, जैसे – मानहानि करना, संपत्ति नष्ट करना, सांप्रदायिक हिंसा आदि|

हेज (Hayes) ने 3 प्रकार के अपराध की चर्चा की –

(1) संपत्ति के विरुद्ध अपराध (Crime against property) – जैसे – चोरी, डकैती, लूट, सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग आदि| हेज के अनुसार संपत्ति के विरुद्ध अपराध कानून एवं नैतिक दोनो नियमों द्वारा निंदनीय होता है|

(2) व्यक्ति के विरुद्ध अपराध (Crime against person) – वह अपराध जो शारीरिक नुकसान या कष्ट दें, जैसे – हमला (assault), हत्या, बलात्कार आदि|

(3) व्यवस्था के विरुद्ध अपराध (Crime against social order) – इसके अंतर्गत यातायात नियमों का उलंघन, सांप्रदायिक दंगे, सरकारी बकाया भुगतान न करना, सार्वजनिक उपद्रव आदि सम्मिलित हैं|

ई. एम. लीमर्ट (E. M. Lemert) ने अपनी पुस्तक सोशल पैथोलॉजी (Social Pathology) में तीन प्रकार के अपराध की चर्चा की –

(1) परिस्थितिजन्य अपराध (Situational or Circumstantial Crime) – जैसे बहुत गरीबी के कारण भोजन के लिए चोरी करना, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद पुलिस लाठीचार्ज के बाद प्रतिक्रिया स्वरूप हिंसात्मक होना आदि|

(2) नियोजित अपराध (Planned or Deliberate Crime) – जैसे सफेदपोश अपराध, पद का दुरुपयोग कर किया जाने वाला अपराध, वेश्यावृत्ति आदि|

(3) भरोसा तोड़ने संबंधी अपराध (Crimes involving confidence) – जैसे आर्मी का जनरल युद्ध के मैदान में विरोधी सेना की तरफ से कार्य करे, बिजनेसमैन किसी लड़की का सेलेक्शन प्रतिभा के आधार पर न करके आकर्षण के तौर पर करता है, तो इस तरह का अपराध भरोसा तोड़ने का दोषी होता है|

लोम्ब्रेासो (Lombroso) ने गुणों एवं विशेषताओं (qualities and features) के आधार पर अपराधी को चार भागों में वर्गीकृत किया –

(1) जन्मजात अपराधी (Born Criminals)

(2) आकस्मिक अपराधी (Casual Criminals)

(3) यौन अपराधी (Sex Criminals)

(4) मानसिक असंतुलित अपराधी (Epileptic Criminals)




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