पारिवारिक विघटन (Family Dis-organisation)


पारिवारिक विघटन (Family Dis-organisation) किसे कहते हैं –


                                 परिवार एक प्राथमिक समूह है, जिसमें रक्त एवं विवाह संबंधी रहते हैं| बच्चों के लालन-पालन की दृष्टि से यह एक अनिवार्य संस्था है| परिवार के माध्यम से ही मूल्य एवं नियम एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता है| लेकिन जब परिवार का ही सदस्य स्थापित एवं मान्य नियमों से विचलित होने लगता है तो सम्पूर्ण परिवार अव्यवस्थित हो जाता है| इसे ही पारिवारिक विघटन कहते हैं|

पारिवारिक विघटन में व्यक्ति में नैतिक एवं शारीरिक खामियाँ उत्पन्न हो जाती है| वास्तव में होता वैयक्तिक विघटन ही है, लेकिन संपूर्ण परिवार पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है,  इसलिए यह पारिवारिक विघटन के रूप में सामने आता है| पारिवारिक झगड़े, पारिवारिक तनाव, व्यभिचार, विवाह-विच्छेद, अवैध संतानों की उत्पत्ति आदि पारिवारिक विघटन के अंतर्गत शामिल हैं|

इलियट एवं मेरिल (Elliott and Merrill) के अनुसार पारिवारिक विघटन में हम किसी भी उन बंधनों की शिथिलता, असामंजस्यता अथवा पृथककरण को सम्मिलित करते हैं जो समूह के सदस्यों को एक दूसरे से बाँधे रखती है|

पारिवारिक विघटन के कारण (Causes of Family Dis-organisation) –

                              
(1) परिवार के सदस्य की व्यक्तिवादी सोंच|

(2) दोषपूर्ण वातावरण|

(3) आपसी सामंजस्य एवं तालमेल की कमी|

(4) नैतिक मूल्यों का पतन|

(5) सदस्यों का अवसरवादी होना|

(6) औद्योगीकरण एवं नगरीकरण का प्रभाव|

(7) सामाजिक एवं व्यावसायिक तनाव|

(8) गरीबी एवं बेरोजगारी|

पारिवारिक विघटन के रोकथाम के उपाय –

(1) बेहतर समाजीकरण द्वारा बच्चों में भावनात्मक लगाव पैदा करना|

(2) परिवार के सदस्यों में संस्कृति के प्रति लगाव पैदा करना|

(3) परिवार के सदस्यों में सामूहिक कल्याण की भावना विकसित करना|

(4) परिवार के सदस्यों को क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोजगार का प्रबंध करना|

(5) सदस्यों में नैतिक मूल्यों का विकास करना|

(6) परिवार के सदस्यों को बेहतर शिक्षा का प्रबंध करना|

(7) विघटन की अवस्था में सलाहकारी संस्थाओं का सहारा लेना|

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