औद्योगीकरण (Industrialization)

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मनुष्य अन्य सभी प्राणियों से श्रेष्ठ है| अपनी विकसित मस्तिष्क के कारण पशु जीवन से आगे बढ़ गया, तथा अविष्कारों को जन्म देकर सभ्य समाज की स्थापना की| इसी क्रम में बड़ी-बड़ी मशीनों का निर्माण किया, जिसके द्वारा अत्यधिक मात्रा में वस्तुओं का उत्पादन शुरु हुआ| इसे ही औद्योगीकरण नाम दिया गया| इसमें मानव एवं पशु उर्जा के स्थान पर निर्जीव ऊर्जा जैसे – बिजली, डीजल, पेट्रोल आदि का प्रयोग होता है|

विलबर्ट मूर (Wilbert Moore) के अनुसार औद्योगीकरण का तात्पर्य आर्थिक उत्पादन के लिए शक्ति के निर्जीव साधनों का विस्तृत प्रयोग है, वह सब कुछ संगठन, यातायात एवं संदेशवाहन आदि के द्वारा उत्पन्न होता है|

एम.एस. गोरे(M.S. Gore) के अनुसार औद्योगीकरण उस प्रक्रिया से संबंधित है, जिसमें वस्तुओं का उत्पादन हाथ से न होकर विद्युत शक्ति द्वारा चालित मशीनों से किया जाता है|

औद्योगीकरण की विशेषताएँ (Characteristics of Industrialization)

(1) औद्योगीकरण के दौरान उद्योगों की स्थापना की जाती है|

(2) श्रम की जगह पूँजी का महत्त्व होता है|

(3) मानवीय तथा पशु श्रम के स्थान पर निर्जीव ऊर्जा जैसे – विद्युत, कोयला, डीजल, पेट्रोल, परमाणु शक्ति, जल शक्ति का प्रयोग किया जाता है|

(4) वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद्धतियों का प्रयोग होता है|

(5) श्रम विभाजन एवं विशेषीकरण की प्रधानता होती है|

(6) जीविकोपार्जन के स्थान पर लाभ के लिए उत्पादन होता है|

(7) अस्थाई बाजार का उद्भव होता है|

(8) वेतन पर आधारित श्रमिक होते हैं|

(9) पेशेवर समूह का निर्माण होता है|

(10) दो वर्गों मालिक एवं मजदूर का उदय होता है|

(11) सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता होती है|

(12) आर्थिक विकास होता है|

(13) अधिकाधिक उत्पादन होता है|

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औद्योगीकरण का समाज पर प्रभाव (Impact of Industrialization on Society)

इसके अंतर्गत हम श्रम विभाजन एवं सामाजिक गतिशीलता पर पड़े प्रभाव की चर्चा करते हैं –

(1) श्रम विभाजन पर प्रभाव (Impact on Division of Labour) – इसे निम्न बिंदुओं में देखा जा सकता है –

(i) जाति एवं धर्म से मुक्त व्यवसायों का उद्भव|

(ii) लौकिकीकरण तथा मानवता का प्रसार|

(iii) नगरीकरण

(iv) नवीन पेशों का जन्म एवं विशेषीकरण|

(2) सामाजिक गतिशीलता पर प्रभाव (Impact on Social Mobility) – सामाजिक गतिशीलता पर पड़े प्रभाव को निम्नवत् देखा जा सकता है –

(i) जातीय कठोरता में कमी|

(ii) संयुक्त परिवार के स्थान पर नाभिकीय परिवार की अधिकता|

(iii) विवाह की संस्था में परिवर्तन जैसे – विवाह विच्छेद एवं प्रेम विवाह|

(iv) औपचारिक शिक्षा का प्रसार|

(v) तकनीकी एवं वाणिज्यिक शिक्षा पर विशेष बल जैसे – एम.बी.ए.(M.B.A.), बी.टेक.(B.Tech.), बी.बी.ए.(B.B.A.), डिप्लोमा(Diploma) आदि|

(vi) नगरीकरण को प्रोत्साहन|

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औद्योगीकरण का नकारात्मक प्रभाव (Negative impact of Industrialization)

(1) वर्ग संघर्ष|

(2) एकाधिकार|

(3) औद्योगिक दुर्घटनाएँ|

(4) हड़ताल|

(5) औद्योगिक बेकारी|

(6) जीवन स्तर में विभिन्नता|

(7) अत्यधिक प्रतिस्पर्धा|

औद्योगीकरण के मार्ग (Paths of Industrialization)

विश्व में औद्योगीकरण को अपनाने का कोई निश्चित मार्ग नहीं है, इसका इतिहास इस बात की पुष्टि करता है कि अपनाये जाने वाले मार्गो में एकरूपता नहीं है| विभिन्न देश अपनी आर्थिक, भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार, जो भी मार्ग उचित समझे, उसे ही अपना लिया|

भारत ने औद्योगिकरण के लिए अनेक मार्गो का समन्वय करने की चेष्टा की| इसलिए भारत को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है| इसके अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र, निजी क्षेत्र सम्मिलित हो जाते हैं | स्वतंत्रता के बाद 1990 तक भारत इसी मार्ग पर चलता रहा| लेकिन मिश्रित अर्थव्यवस्था के आशानुरूप सफलता न मिलने के कारण 1991 से भारत ने औद्योगीकरण के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना शुरू किया, क्योंकि यह महसूस किया जाने लगा कि उद्योगों का संचालन निजी प्रबंधन में बेहतर तरीके से किया जा सकता है| इसीलिए सरकार ने औद्योगीकरण की नई नीति अपनाई है, जो उदारीकरण(Liberalization), निजीकरण(Privatization), वैश्वीकरण(Globalization), पी.पी.पी. मॉडल (Public-private Partnership) पर आधारित है|

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