विज्ञानों का संस्तरण/वर्गीकरण (कॉम्टे)

विज्ञानों का संस्तरण/ vigyano ka vargikaran

कॉम्टे ने अपनी पुस्तक “Postitive Philosophy” में विज्ञानों का संस्तरण/वर्गीकरण प्रस्तुत किया| इन विज्ञानों के बीच पाए जाने वाले संबंधों एवं संस्तरणों को भी स्पष्ट किया|

Vigyano ke sanstaran ka tatparya (विज्ञानों के संस्तरण का तात्पर्य)

विज्ञानों के संस्तरण/वर्गीकरण का तात्पर्य विज्ञानों का उच्चता एवं निम्नता के आधार पर विभाजन है| इस विभाजन में कॉम्टे ने सबसे पहले गणितशास्त्र को; एवं अंतिम स्थान समाजशास्त्र को दिया|

संस्तरण का आधार

कॉम्टे ने बिभिन्न विज्ञानों का संस्तरण/वर्गीकरण दो प्रमुख आधारों पर किया

1. बढती हुई निर्भरता का सिद्धान्त (The principle of increasing dependence)

कॉम्टे के अनुसार ज्ञान या विज्ञान की प्रत्येक शाखा अपने से पहले की शाखा के सिद्धांतों पर आश्रित होती है| लेकिन जो सबसे पहली शाखा है; वह किसी पर निर्भर नहीं है| जो दूसरा विज्ञान विकसित होगा, वह पहले पर आश्रित होगा; एवं जो तीसरा विज्ञान होगा वह पहले के दोनों विज्ञानों पर आश्रित| इसी तरह यह क्रम चलता रहता है| ये विज्ञान उसी तरह एक दूसरे पर निर्भर हैं; जिस क्रम में इनका विकास हुआ है|

2. घटती हुई सामान्यता तथा बढती हुई जटिलता का सिद्धान्त (Principle of decreasing generality and increasing complexity)

इस सिद्धान्त के अनुसार जैसे-जैसे एक विज्ञान की निर्भरता अन्य विज्ञानों पर बढती जाती है; वह कम सामान्य एवं अधिक जटिल होती जाती है| कॉम्टे ने इसे स्पष्ट करते हुए लिखा है की जो घटनाएँ सार्वभौमिक रूप से पायी जाती है; उसका अध्ययन करना सरल है|जैसे-जैसे नियमों में बिभिन्नता बढती जाती है; उसकी विषयवस्तु में सामान्यता की जगह विशेषीकरण होने लगता है| उस विज्ञान की प्रकृति भी जटिल होती जाती है| इसी आधार पर कॉम्टे कहते हैं कि जो घटनाएँ पहले घटती है; वे अपेक्षाकृत सरल होती हैं| इसका अध्ययन करने वाला विज्ञान तुलनात्मक रूप से सामान्य, सरल एवं कम जटिल होता है| इसके बाद विकसित होने वाला विज्ञान पहले से कम सरल एवं अधिक जटिल होगा| इसी तरह यह क्रम आगे चलता रहता है|

उपर्युक्त दोनों सिद्धांतों के आधार पर विज्ञानों के विकासक्रम को निम्न चार्ट में देखा जा सकता है-

विज्ञानों को निश्चित स्थान प्रदान करने के लिए कॉम्टे ने गणित को प्रथम स्थान देने के बाद; प्राकृतिक घटनाओं को दो भागों में विभाजित किया-

1. अजीवज (In-organic)

अजीवज घटनाएँ वे हैं, जिनमे जीवन नहीं होता है| इसके अंतर्गत खगोल सम्बन्धी एवं स्थलीय घटनाएँ शामिल हैं| खगोल सम्बन्धी घटनाएँ अत्यन्त सामान्य होती हैं| इनमे बहुत कम परिवर्तन होता है; जैसे- ग्रह, उपग्रह, नक्षत्र, तारे आदि| इसका अध्ययन खगोलशास्त्र करता है|

  स्थलीय घटनाओं का अध्ययन दो विज्ञान भौतिकशास्त्र एवं रसायनशास्त्र करते हैं|

2. जीवज (Organic)

जीवज घटनाएँ दो तरह की होती हैं-

(i) व्यक्तिगत

व्यक्तिगत घटनाओं में मानव, पशुजगत एवं वनस्पति जगत सम्मिलित है| जिसका अध्ययन प्राणिशास्त्र (Biology) करता है|

(ii) सामूहिक

सामूहिक घटनाओं का अध्ययन समाजशास्त्र के द्वारा किया जाता है|

लेविस कोजर लिखते हैं की कॉम्टे द्वारा प्रस्तुत विज्ञानों का संस्तरण उनके त्रिस्तरीय सिद्धान्त से घनिष्ठ रूप से सम्बंधित है|

कॉम्टे ने बढती हुई निर्भरता तथा घटती हुई सामान्यता के आधार पर विज्ञानों का वर्गीकरण किया| इसमें उन्होंने गणितशास्त्र को पहला एवं समाजशास्त्र को अंतिम स्थान दिया| सबसे अंतिम में विकसित होने के बावजूद कॉम्टे ने समाजशास्त्र को सभी विज्ञानों की रानी कहा| क्योंकि यह सभी विज्ञानों से जटिल है| कॉम्टे द्वारा प्रस्तुत विज्ञानों के संस्तरण को निम्नवत देखा जा सकता है|

स्वतंत्र –     (1) गणितशास्त्र

अजीवज –  (2) खगोलशास्त्र

          (3) भौतिकशास्त्र

          (4) रसायनशास्त्र

जीवज–    (5) प्राणिशास्त्र

          (6) समाजशास्त्र

1. गणितशास्त्र (Mathematics)

कॉम्टे ने विज्ञानों के संस्तरण में पहला स्थान गणितशास्त्र को दिया| यह सबसे पुराना एवं पूर्ण विज्ञान है| यही सभी अन्य विज्ञानों का आधार है| कॉम्टे ने गणितशास्त्र को दोषरहित एवं स्वतंत्र विज्ञान के रूप में व्याख्यायित किया है|

2. खगोलशास्त्र (Astronomy)

विज्ञानों के संस्तरण के क्रम में गणितशास्त्र के बाद; दूसरा स्थान खगोलशास्त्र का आता है| इसके अंतर्गत ग्रह, नक्षत्र से सम्बंधित नियम आते हैं; जिनके आधार पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक निश्चित क्रम में गतिशील है|

3. भौतिकशास्त्र (Physics)

यह स्थलीय घटनाओं का अध्ययन करने वाला विज्ञान है| इसके अंतर्गत भौतिक पदार्थों सम्बन्धी नियम आ जाते है; जैसे- भार, ताप, गुरुत्वाकर्षण आदि|

4. रसायनशास्त्र (Chemistry)

इसके अंतर्गत बिभिन्न पदार्थों की रासायनिक संरचना, स्वरूपों एवं रासायनिक क्रियाओं आदि का अध्ययन किया जाता है|

5. प्राणिशास्त्र (Biology)

इसके अंतर्गत मानव, पशु एवं वनस्पति जगत की संरचना एवं क्रियाएँ आ जाती हैं|

6. समाजशास्त्र (Sociology)

कॉम्टे के अनुसार सामूहिक घटनाओं का अध्ययन समाजशास्त्र द्वारा किया जाता है| यह अपने से पूर्व के सभी विज्ञानों पर निर्भर है; तथा सबसे अधिक जटिल एवं विशिष्ट है|

अपनी अगली पुस्तक “Positive Polity” में कॉम्टे ने एक सातवें विषय नीतिशास्त्र (Ethics) का उल्लेख किया है| लेकिन इसे विज्ञानों के संस्तरण में कोई स्थान नहीं देते हैं|

कॉम्टे के अनुसार किसी भी विज्ञान के विषय का उचित ज्ञान तब तक नहीं हो सकता; जब तक उसके पहले वाले विज्ञानों; जिस पर वह निर्भर है; के बारे में हम ज्ञान न प्राप्त कर लें| अतः समाजशास्त्र की सहायता से समाज के बारे में हम तब तक समुचित ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकते; जब तक हमें इसके पूर्व के पाँचों विज्ञानों के बारे में सामान्य जानकारी न हो|

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