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सामाजिक परिवर्तन (Social Change)

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न.1- सामाजिक परिवर्तन किसे कहते हैं?

 उत्तर – सामाजिक परिवर्तन (Social Change) – सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तन से हैं, चूँकि सामाजिक संरचना संस्थाओं से मिलकर बना है| अतः सामाजिक संस्थाओं या इनके बीच पाये जाने वाले संबंधों में परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहते हैं|

जॉनसन के अनुसार अपने मूल अर्थ में सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संरचना में परिवर्तन है|

मैकाइवर के अनुसार समाज परिवर्तनशील एवं गत्यात्मक है|

ग्रीक दार्शनिक हेराक्लाइट्स ने कहा है कि सभी वस्तुएं परिवर्तन के बहाव में हैं| हेराक्लाइट्स आगे लिखते हैं कि आप नदी की एक धारा में दो बार स्नान नहीं कर सकते|

समाजशास्त्र के जनक अॉगस्त काम्टे ने भी समाजशास्त्र के अध्ययन की विषय वस्तु की दो स्थितियों को रेखांकित किया – एक सामाजिक स्थितिकी (Social Statics) एवं दूसरा सामाजिक गतिकी (Social Dynamics) है| पहले का संबंध सामाजिक संरचना से हैं जबकि दूसरे का संबंध सामाजिक परिवर्तन से हैं|

प्रश्न.2- सामाजिक परिवर्तन  की विशेषताओं का उल्लेख करें?

उत्तर – सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहते हैं|

इसकी विशेषताओं को निम्न बिंदुओं में देखा जा सकता है|

सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएँ –

(1) सामाजिक परिवर्तन सार्वभौमिक घटना है|

(2) सामाजिक परिवर्तन समाज की संरचना एवं प्रकार्यों में परिवर्तन को कहते हैं|

(3) सामाजिक परिवर्तन की प्रकृति सामाजिक होती है|

(4) सामाजिक परिवर्तन अनिवार्य एवं स्वाभाविक घटना है|

(5) सामाजिक परिवर्तन की गति सभी जगह समान नहीं होती है|

(6) किसी समाज में परिवर्तन की क्या गति होगी यह उस समाज में विद्यमान अन्य कारकों पर निर्भर करता है|

(7) सामाजिक परिवर्तन कभी भी एक कालिक (Time) नहीं हो सकता, यह दो काल में ही देखा जा सकता है|

प्रश्न.3- सामाजिक परिवर्तन के कारकों का उल्लेख कीजिए?

उत्तर – सामाजिक परिवर्तन के कारक (Factors of Social change) –  सामाजिक संरचना में प्रत्येक इकाई का प्रयास रहता है कि वह प्रदत्त प्रस्थित से उठकर अर्जित प्रस्थित को प्राप्त करे| इस प्रयास में वह अपनी योग्यता, कुशलता एवं निपुणता का प्रदर्शन करता है, जिससे वह अपने पूर्ववर्ती प्रस्थिति को परिवर्तित कर आगे बढ़ सके| यही परिवर्तन का प्रमुख कारण है|

जेन्सन (M.D. Jenson) के अनुसार लोगों के सोचने एवं करने के तरीकों में बदलाव ही सामाजिक परिवर्तन है|

किंग्सले डेविस के अनुसार सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य केवल उन्हीं परिवर्तनों से है जो सामाजिक संगठन अर्थात् समाज की संरचना एवं प्रकार्यों में घटित होता है|(By social change is meant only such alterations as occur in social organization that is the structure and functions of society.)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न.- सामाजिक परिवर्तन किसे कहते हैं|  विस्तृत चर्चा करें?

उत्तर – सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तन से हैं, चूँकि सामाजिक संरचना संस्थाओं से मिलकर बना है| अतः सामाजिक संस्थाओं या इनके बीच पाये जाने वाले संबंधों में परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहते हैं|

जॉनसन के अनुसार अपने मूल अर्थ में सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संरचना में परिवर्तन है|
जेन्सन (M.D. Jenson) के अनुसार लोगों के सोचने एवं करने के तरीकों में बदलाव ही सामाजिक परिवर्तन है|
सामाजिक परिवर्तन के चार मूल तत्व होते हैं –

(1) स्थान (Space) – सामाजिक परिवर्तन का संबंध किसी न किसी स्थान से अवश्य होता है|

(2) समय (Time) – सामाजिक परिवर्तन के लिए दो समय का होना आवश्यक है, एक पहले का समय एवं एक वर्तमान या बाद का समय| जिसमें पहले की अपेक्षा परिवर्तन परिलक्षित हुआ हो|

(3) प्रघटना (Phenomenon) – किसी सामाजिक परिवर्तन के लिए किसी वस्तु या घटना का होना आवश्यक है|

(4) भिन्नता (Variation) – भिन्नता का तात्पर्य है कि यदि पहले की स्थित एवं बाद की स्थित में कोई बदलाव नहीं है वो तो उसे परिवर्तन नहीं कहा जा सकता| अतः दोनों स्थितियों में बदलाव होना चाहिए|

सामाजिक परिवर्तन दो प्रकार का होता है –

(1) संरचना में परिवर्तन (Change in Structure) – यह आंशिक परिवर्तन होता है, जैसे सुधार आंदोलन, पश्चिमीकरण, संस्कृतीकरण (Sanskritization) आदि|

(2) संरचनात्मक परिवर्तन (Structural Change) – यह पूर्ण परिवर्तन को व्यक्त करता है, जैसे – क्रान्ति, औद्योगीकरण, नगरीकरण आदि|

सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएँ –

(1) सामाजिक परिवर्तन सार्वभौमिक घटना है|

(2) सामाजिक परिवर्तन समाज की संरचना एवं प्रकार्यों में परिवर्तन को कहते हैं|

(3) सामाजिक परिवर्तन की प्रकृति सामाजिक होती है|

(4) सामाजिक परिवर्तन अनिवार्य एवं स्वाभाविक घटना है|

(5) सामाजिक परिवर्तन की गति सभी जगह समान नहीं होती है|

(6) किसी समाज में परिवर्तन की क्या गति होगी यह उस समाज में विद्यमान अन्य कारकों पर निर्भर करता है|

(7) सामाजिक परिवर्तन कभी भी एक कालिक (Time) नहीं हो सकता, यह दो काल में ही देखा जा सकता है|

सामाजिक परिवर्तन क्यों एवं किस प्रकार होता है, इसके लिए विद्वानों ने अनेक कारकों का उल्लेख किया है जो निम्न है –

(1) प्राकृतिक या भौगोलिक कारक|

(2) जैविकीय कारक|

(3) जनसंख्यात्मक कारक|

(4) आर्थिक कारक|

(5) सांस्कृतिक कारक|

(6) प्रौद्योगिक कारक|

(7) मनोवैज्ञानिक कारक|

(8) राजनीतिक कारक|

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