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पैरेटो का अभिजनों के परिभ्रमण का सिद्धांत
(Pareto’s theory of circulation of elites)


इटली के समाजशास्त्री विलफ्रेडो पैरेटो (Vilfredo Pareto) ने अपनी पुस्तक माइंड एण्ड सोसाइटी (Mind and Society) में सामाजिक परिवर्तन का सिद्धांत प्रस्तुत किया| इसे अभिजनों के परिभ्रमण (Circulation of elites) के सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है| उन्होंने आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों की चर्चा की| लेकिन मुख्य ध्यान राजनीति क्षेत्र पर ही केंद्रित किया|

पैरेटो के अनुसार परिवर्तन केवल क्रांति द्वारा शासक को बदलने से ही नहीं आता, बल्कि अभिजनों के परिभ्रमण से भी आता है| उन्होंने सामाजिक परिवर्तन का मुख्य कारण समाज में राजनीतिक सत्ता के लिए होने वाला संघर्ष माना| उनके अनुसार प्रत्येक समाज में दो समूह पाए जाते हैं –

(1)अभिजन (Elite)          (2) जनसाधारण (Mass)

पैरेटो के अनुसार व्यक्ति जो समाज के एक निश्चित क्षेत्र में विशेष क्षमता से युक्त होते हैं, तथा उच्च स्थान धारण करते हैं, उन्हें अभिजन (Elite) या कुलीनजन (Aristocrate) कहते हैं|जनसाधारण के अंतर्गत पैरेटो ने श्रमिकों, सामान्य कर्मचारियों तथा अपनी मेहनत से जीवन-यापन करने वाले सामान्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया|

पैरेटो, अभिजन को पुनः दो भागों में विभाजित करते हैं –

(1) शासकीय अभिजन (Governing elite)
(2) गैर-शासकीय अभिजन (Non-governing elite)

शासकीय अभिजन वे लोग हैं जो वर्तमान समय में सत्ता में हैं एवं गैर-शासकीय अभिजन वे लोग हैं जो सत्ता में नहीं है| लेकिन किसी न किसी रूप में शासन और सरकार पर अपना कुछ प्रभाव अवश्य बनाए हुए हैं| वर्तमान समय में इसे समझना चाहे तो, जिस पार्टी के लोग सरकार में है, वे शासकीय अभिजन है एवं जिस पार्टी के लोग विपक्ष में है, वे गैर-शासकीय अभिजन हैं|

पैरेटो के अनुसार शासकीय अभिजन समाज के निम्न वर्ग या सामान्य जनों के योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्तियों को अपने वर्ग में आने से रोकता है| जिससे समाज का संतुलन बिगड़ने लगता है तथा समाज में अवनति के लक्षण दिखाई देने लगते हैं| इस असंतुलन को दूर करने के लिए तीब्र सामाजिक परिवर्तन या क्रांति द्वारा धीरे-धीरे पुराने अभिजनों का स्थान नये योग्य व्यक्तियों द्वारा ले लिया जाता है| जहाँ जनसाधारण से कुछ लोग अभिजन में प्रवेश कर जाते हैं, वही एक अवस्था के बाद अभिजन के कुछ लोग गुणों की कमी के कारण जनसाधारण की श्रेणी में आ जाते हैं| इसीलिए पैरेटो ने लिखा है कि इतिहास कुलीनतन्त्रों का कब्रगाह है| (History is a graveyard of aristocracies)

पैरेटो के अनुसार दोनों ही समूह के लोग स्थिर नहीं है| अभिजन व्यक्ति जब अपनी क्षमता एवं योग्यता खो देता है तो उसका जनसाधारण में पतन हो जाता है तथा अभिजन के खालीपन को भरने के लिए जनसाधारण का बुद्धिमान एवं कुशल व्यक्ति अभिजन में शामिल हो जाता है| लेकिन अभिजन का परिभ्रमण शासकीय एवं गैर-शासकीय वर्गों के बीच ही होता है| इसी परिवर्तन को पैरेटो ने अभिजनों का परिभ्रमण कहा| इस परिवर्तन से सामाजिक संरचना में भी परिवर्तन दिखाई देता है|

पैरेटो ने राजनीति क्षेत्र में अभिजन के शासन को मनोवैज्ञानिक आधार पर विश्लेषित किया, जिसे मैकियावेली (Machiavelli) ने शेर (Lion) एवं लोमड़ी (Fox) से संबोधित किया| पैरेटो के अनुसार शेर वे अभिजन है, जिनमें रुढ़िवादी विचारधारा हावी होती है| रुढ़िवादी होने के कारण आवश्यकता पड़ने पर बल पूर्वक एवं कठोर शासन भी करते हैं| जबकि लोमड़ी के अंतर्गत वे अभिजन शामिल हैं, जो जोड़-तोड़ एवं चतुराई से शासन करते हैं| इनके शासन में लचीलापन होता है| अतः कभी शेर मानसिकता के लोग तो कभी लोमड़ी मानसिकता के लोग शासन करते हैं, इस तरह यह चक्र चलता रहता है|
आर्थिक क्षेत्र में भी दो तरह के अभिजन निश्चित आय वाला (Rentiers) एवं स्टोरिया (Speculators) होते हैं| जिनके बीच आर्थिक चक्र का परिवर्तन होता रहता है| निश्चित आय वाला वर्ग पूंजी बढ़ाने का जोखिम नहीं लेना चाहता, जबकि सटोरिया सम्भावनाओं एवं अवसर का लाभ उठाना चाहता है| इसकी प्रवृत्ति अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने की होती है| आर्थिक क्षेत्र में कभी जोखिम लेने वालों (सटोरिया) तो कभी निश्चित आय वालों का वर्चस्व दिखाई देता है| इस तरह यह चक्र चलता रहता है|


3 thoughts on “पैरेटो का अभिजनों के परिभ्रमण का सिद्धांत
(Pareto’s theory of circulation of elites)”

  1. thank you so much. it was detailed and i understood since the language wasn’t very tough. it’s my sociology exam today and this helped me a lot.

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