जाति एवं वर्ग (Caste and Class)


जाति एक अंतःविवाही (Endogamous) समूह है, जिसकी अपनी उप-संस्कृति होती है | जहाँ वर्ग का आधार आर्थिक होता है , वहीं जाति का आधार सामाजिक सांस्कृतिक होता है | वर्ग एक अर्जित प्रस्थिति है जबकि जाति प्रदत्त स्थिति है |

भारतीय सामाजिक संस्थाओं में जाति का महत्वपूर्ण स्थान है | पश्चिमी समाज में स्तरीकरण का आधार वर्ग है तो भारत में जाति | मजुमदार के अनुसार जाति व्यवस्था भारत में अनुपम है | सामान्यतः भारत जातियों एवं संप्रदायों की परंपरागत स्थली मानी जाती है, ऐसा कहा जाता है कि यहाँ की हवा में भी जाति घुली हुई है और यहाँ तक कि मुसलमान तथा ईसाई भी इससे अछूते नहीं बचे हैं |

श्रीमती ईरावती कर्वे (Iravati Karve) लिखती हैं कि यदि हम भारतीय संस्कृति के तत्वों को समझना चाहते हैं तो जाति प्रथा का अध्ययन करना नितान्त आवश्यक है |

जाति व्यवस्था की विशेषताएँ (Characteristics of Caste system)

एन.के.दत्ता ने जाति की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है –

(1) एक जाति के सदस्य जाति के बाहर विवाह नहीं कर सकते |

(2) प्रत्येक जाति में दूसरी जातियों के साथ खान-पान के संबंध में कुछ प्रतिबंध होते हैं |

(3) अधिकांश जातियों के पेशे निश्चित होते हैं |

(4) जातियों में ऊँच-नीच का एक संस्तरण पाया जाता है, जिसमें ब्राह्मणों की स्थिति सर्वमान्य रूप से शिखर पर होती है |

(4) व्यक्ति की जाति उसके जन्म के आधार पर ही आजीवन के लिए निश्चित हो जाती है |

(6) सम्पूर्ण जाति व्यवस्था ब्राम्हणों की श्रेष्ठता पर आधारित होती है |

जाति तथा वर्ण में अंतर (Difference between Caste and Varna)

(1) वर्ण एक सैद्धांतिक व्यवस्था है, जबकि जाति वास्तविक है|

(2) जाति की सदस्यता व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होती है, जबकि वर्ण की गुण एवं कर्म के आधार पर|

(3) वर्ण, जाति की अपेक्षा अधिक प्राचीन है|

(4) वर्ण में खान-पान एवं सामाजिक सहवास पर प्रतिबंध नहीं पाए जाते हैं जबकि जाति में पाए जाते हैं|

जाति व्यवस्था में परिवर्तन के कारण

(1) आधुनिक शिक्षा|

(2) औद्योगिक विकास – इसकी अंतर्गत उत्पादन परम्परागत आधार पर न होकर मशीनों द्वारा होता है|

(3) नये व्यवसायों का जन्म – गैर कृषि व्यवसायों में वृद्धि के कारण सभी जातियाँ उसे अपनाने लगीं|

(4) पूँजी की प्रधानता – व्यक्ति की जगह मशीनों की प्रधानता, जैसे – ट्रैक्टर|

(5) नगरीकरण का प्रभाव|

(6) सामाजिक सुधार आंदोलन|

(7) सरकारी प्रयास – नियोजन तथा कल्याणकारी राज्य की भूमिका|

(8) जाति पंचायत तथा जजमानी प्रथा की समाप्ति|

वर्ग (Class)

वर्ग अर्जित प्रस्थिति पर आधारित होता है | वर्ग का मुख्य आधार आर्थिक है, व्यक्ति अपनी योग्यता, शिक्षा, ज्ञान आदि के द्वारा वर्ग में अपनी स्थिति को उच्च कर सकता है | वर्ग को मुख्य रूप से तीन भागों में बाटा जा सकता है – (1) निम्न वर्ग (2) मध्यम वर्ग (3) उच्च वर्ग

(1) निम्न वर्ग (Lower Class) – यह वह वर्ग है जो अपने जीविकोपार्जन के लिए अपना शारीरिक श्रम बेचता है तात्पर्य है कि यह वर्ग शारीरिक कार्य करता है, जैसे मजदूर |

(2) मध्यम वर्ग (Middle Class) – यह वह वर्ग है जो मानसिक कार्य करता है | अपनी शिक्षा एवं योग्यता के आधार पर निम्न वर्ग से ऊपर होता है | किन्तु इनके पास संपत्ति का स्वामित्व नहीं होता है, जैसे – क्लर्क, टीचर, इंजीनियर, मैनेजर आदि |

(3) उच्च वर्ग (Higher Class) – यह वर्ग संपत्ति का मालिक होता है, इसके अधीनस्थ मध्यम एवं निम्न वर्ग कार्य करते हैं , जैसे किसी कंपनी या संस्थान का मालिक |

वर्ग की विशेषताएँ (Characteristics of Class)

(1) वर्ग निर्माण का मुख्य आधार आर्थिक होता है|

(2) एक वर्ग की प्रस्थिति एक समान होती है |

(3) कुछ वर्गों का ऊपर, कुछ का मध्यम एवं शेष का निम्नतम स्थान होता है |

(4) वर्ग की सदस्यता अर्जित होती है |

(5) व्यक्ति प्रयास द्वारा अपनी वर्गीय स्थिति परिवर्तित कर सकता है |

जाति एवं वर्ग में अन्तर (Difference between Caste and Class)

(1) जाति एक बंद व्यवस्था है, जबकि वर्ग में खुलापन पाया जाता है|

(2) जाति की सदस्यता प्रदत्त होती है, जबकि वर्ग की अर्जित|

(3) जाति में पेशे निश्चित होते हैं, वर्ग में नहीं |

(4) जाति में खान-पान संबंधी प्रतिबंध होता है वर्ग में नहीं |

(5) जाति अंतःविवाही समूह है, वर्ग नहीं |

(6) जाति वर्ग की अपेक्षा अधिक स्थिर है |

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11 thoughts on “
जाति एवं वर्ग (Caste and Class)

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